18 September 2026

खरीफ फसल में छिड़काव: कपास, धान और सोयाबीन के लिए सही स्प्रेयर

A farmer wearing a mask, safety glasses and gloves spraying a cotton crop with a blue battery knapsack sprayer under monsoon clouds

खरीफ का छिड़काव साल के सबसे मुश्किल मौसम में होता है। बारिश असर करने से पहले ही दवा को पत्तियों से धो सकती है, नमी वाले दिन बीमारी लाते हैं, और सीज़न के बीच तक कपास छिड़काव करने वाले से भी ऊंची हो जाती है। इस मौसम में खेती के लिए सही स्प्रेयर मशीन वही है जो आपकी फसल, उसकी ऊंचाई और मौसम के असली मौके के हिसाब से ठीक बैठे।

यह गाइड खरीफ की चार मुख्य फसलों, कपास, धान, सोयाबीन और मूंगफली, के लिए सही स्प्रेयर बताती है, और वह समय, तरीका, नोजल, सुरक्षा और सफाई समझाती है जिनसे छिड़काव का पूरा फायदा मिलता है। इसमें सिर्फ मशीन और तरीके की बात है। कौन सी दवा और कितनी मात्रा डालनी है, इसके लिए हमेशा लेबल और अपने कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह मानिए।

सीधा जवाब: खरीफ की किस फसल के लिए कौन सा स्प्रेयर?

फसलछिड़काव की चुनौतीसही स्प्रेयरनोजल
कपासपत्तियों के नीचे रस चूसने वाले कीट, पौधे ऊंचे हो जाते हैंशुरू में बैटरी या हाथ वाला नैपसैक, फसल ऊंची होने पर पावर स्प्रेयर या लंबे पाइप वाला सेटअपकीटों के लिए हॉलो कोन
धानखेत में खड़ा पानी, पौधे के निचले हिस्से पर कीटबैटरी या हाथ वाला नैपसैकहॉलो कोन, निचले हिस्से पर निशाना
सोयाबीनबड़ा रकबा, नमी वाला मौसम, फूल आने के समय कीट और बीमारीजल्दी काम के लिए पावर स्प्रेयर, छोटे खेत के लिए नैपसैककीटों के लिए हॉलो कोन, खरपतवारनाशक के लिए फ्लैट फैन
मूंगफलीनिचली पत्तियों पर पत्ती धब्बा और रतुआबैटरी या हाथ वाला नैपसैकहॉलो कोन, पत्तियों के नीचे तक पहुंचे

नीचे हर चुनाव का कारण समझाया गया है। स्प्रेयर के सभी स्पेसिफिकेशन ALAP और MILAP रेंज से हैं, जिसे Almighty Agrotech राजकोट में बनाती है।

मानसून में छिड़काव अलग क्यों है

खरीफ के मौसम में तीन चीज़ें बदलती हैं: बारिश, हवा और नमी। तीनों को ध्यान में रखकर योजना बनाइए।

  • बारिश: वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय की सलाह है कि बारिश से ठीक पहले या बारिश के तुरंत बाद छिड़काव न करें, और छिड़काव ठंडे और शांत दिन में करें। टंकी में घोल बनाने से पहले मौसम का अनुमान देख लीजिए।
  • छिड़काव के बाद बारिश: दवा बारिश में कितनी टिकती है, यह लेबल पर लिखा होता है। FAO के ज़मीनी छिड़काव दिशानिर्देश बताते हैं कि ज़्यादातर दवाओं में छिड़काव के दो घंटे बाद हुई बौछार से दोबारा छिड़काव की ज़रूरत नहीं पड़ती, लेकिन आखिरी बात लेबल की ही है।
  • हवा: इन्हीं FAO दिशानिर्देशों में लगभग 3 से 7 km/h की हल्की हवा, जब पत्तियां सरसराएं और चेहरे पर हवा महसूस हो, छिड़काव के लिए सबसे सही मानी गई है। बिल्कुल ठहरी या बहुत धीमी हवा में छिड़काव न करें, और जब पत्तियां लगातार हिल रही हों तब खरपतवारनाशक न छिड़कें।
  • दिशा: हमेशा हवा की दिशा में छिड़काव कीजिए, उसके खिलाफ नहीं, ताकि दवा उड़कर आपकी तरफ न आए।
  • दिन का समय: सुबह या शाम छिड़काव कीजिए जब ठंडक और हवा शांत हो, जैसा ICAR की सोयाबीन सलाह कीटनाशक के लिए बताती है।
  • नमी और बीमारी: पत्तियां देर तक गीली रहें तो बीमारी का खतरा बढ़ता है। सोयाबीन में नमी वाला मौसम जो पत्तियों को तीन से चार घंटे गीला रखे, और रात या सुबह का कोहरा, रतुआ की संभावना बढ़ाते हैं।

खरीफ में कपास पर छिड़काव

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अनुसार, Bt कपास में सुंडियों (बॉलवर्म) से फसल खुद काफी हद तक बची रहती है, और सबसे ज़्यादा नुकसान सफेद मक्खी, जैसिड, माहू और मिलीबग जैसे रस चूसने वाले कीट करते हैं। ये कीट बढ़वार और फूल-फल, दोनों अवस्थाओं में पत्तियों की निचली सतह पर रहते हैं, और लापरवाही से किया छिड़काव ठीक वहीं नहीं पहुंचता।

  • कवरेज: छिड़काव को ऊपर की तरफ पौधे के अंदर तक भेजिए, ताकि दवा पत्तियों की निचली सतह तक पहुंचे, सिर्फ ऊपरी सतह पर नहीं।
  • घोल की मात्रा: रस चूसने वाले कीटों के लिए हाथ वाले नैपसैक स्प्रेयर से PAU के शोधकर्ता 300 से 375 लीटर घोल प्रति हेक्टेयर बताते हैं, यानी लगभग 120 से 150 लीटर प्रति एकड़। 16 लीटर की टंकी से यह लगभग 8 से 10 टंकी प्रति एकड़ होता है।
  • फसल की ऊंचाई: नैपसैक स्प्रेयर लगभग 1.5 मीटर तक ऊंची फसल के लिए ठीक रहते हैं। कपास इससे ऊंची हो जाए, तो कंधे की ऊंचाई पर पकड़ा लांस पूरे पौधे को कवर नहीं कर पाता।
  • स्प्रेयर का चुनाव: फसल छोटी हो तब बैटरी स्प्रेयर या हाथ वाला नैपसैक स्प्रेयर लीजिए। बड़े रकबे में ऊंची फसल के लिए 3 फुट गन वाला पावर स्प्रेयर, या दो-तीन लंबे पाइप चलाने वाला HTP स्प्रेयर चलने की मेहनत बचाता है और प्रेशर बनाए रखता है।

खरीफ में धान पर छिड़काव

धान में छिड़काव पानी में खड़े होकर होता है, और इसके कुछ सबसे बड़े कीट पौधे के सबसे नीचे छिपे रहते हैं। भूरा फुदका (ब्राउन प्लांटहॉपर) के शिशु और वयस्क पानी के ठीक ऊपर पौधे के निचले हिस्से पर जमा रहते हैं, और ज़्यादा हमले पर खेत में गोल सूखे धब्बे बनते हैं जिन्हें हॉपर बर्न कहते हैं।

  • नीचे निशाना: तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय की सलाह है कि भूरे फुदके के लिए छिड़काव से पहले पानी निकाल दें और छिड़काव पौधों के निचले हिस्से की तरफ करें
  • स्प्रेयर का चुनाव: बैटरी या हाथ वाला नैपसैक स्प्रेयर सबसे व्यावहारिक है। मेड़ और कतारों में चलना होता है, और गीले खेत में हल्की मशीन उठाना आसान रहता है।
  • टंकी का आकार: ALAP और MILAP बैटरी स्प्रेयर में 16 से 20 लीटर की टंकी है, और MILAP ECO KPI-4 हाथ वाले नैपसैक में 20 लीटर, यानी गीले खेत में भरने के लिए कम चक्कर।
  • लांस स्थिर रखिए: लांस नीचे रखकर पौधों के बीच एक जैसा घुमाइए, ताकि हर पौधे का निचला हिस्सा कवर हो।

खरीफ में सोयाबीन पर छिड़काव

सोयाबीन का रकबा बड़ा होता है, इसलिए एक दिन में कितना घोल छिड़का जा सकता है यह मायने रखता है। ICAR का सोयाबीन विस्तार बुलेटिन मशीन को लेकर साफ सलाह देता है।

  • घोल की मात्रा: फसल की अवस्था के हिसाब से सोयाबीन में नैपसैक स्प्रेयर से लगभग 500 लीटर घोल प्रति हेक्टेयर, या पावर स्प्रेयर से लगभग 120 लीटर प्रति हेक्टेयर चाहिए। बुलेटिन चेतावनी देता है कि इससे कम मात्रा में छिड़काव से मनचाहा नतीजा नहीं मिलता।
  • प्रति एकड़ इसका मतलब: नैपसैक से लगभग 200 लीटर प्रति एकड़, यानी 16 लीटर की टंकी के लगभग 12 से 13 चक्कर, जबकि पावर स्प्रेयर से लगभग 50 लीटर प्रति एकड़, यानी 20 लीटर टंकी के लगभग 2 से 3 चक्कर।
  • स्प्रेयर का चुनाव: बड़े सोयाबीन रकबे के लिए बुलेटिन पावर और बूम स्प्रेयर को ऐसे विकल्प बताता है जो पानी, समय और मज़दूरी तीनों बचाते हैं। छोटे खेत में पूरी मात्रा रखें तो बैटरी या हाथ वाला नैपसैक भी काम करता है।
  • समय: कीटनाशक सुबह या शाम छिड़किए। बुलेटिन यह भी कहता है कि ज़रूरत हो तो फूल आने की अवस्था में भी कीटनाशक का छिड़काव न टालें, क्योंकि इल्लियां फूलों को खाती हैं।
  • बीमारी पर नज़र: नमी वाले मौसम में रतुआ अक्सर फूल आने के आसपास दिखता है, और इसके धब्बे ज़्यादातर पत्ती की निचली सतह पर होते हैं, इसलिए पौधे के निचले हिस्से का कवरेज ज़रूरी है।

खरीफ में मूंगफली पर छिड़काव

मूंगफली नीची और फैलने वाली फसल है, और इसकी मुख्य बीमारियां पत्तियों से शुरू होती हैं। तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय के अनुसार, पत्ती धब्बा (टिक्का) बुवाई के लगभग एक महीने बाद दिखने लगता है और फूल आने तथा कटाई के पास ज़्यादा गंभीर होता है, जबकि रतुआ फसल छह हफ्ते से ज़्यादा की होने पर आता है, और इसके नारंगी दाने पहले पत्तियों की निचली सतह पर बनते हैं।

  • कवरेज: रतुआ पत्ती के नीचे से शुरू होता है, इसलिए नोजल को ऐसा झुकाइए कि छिड़काव पत्तियों के नीचे तक पहुंचे, सिर्फ ऊपर नहीं।
  • स्प्रेयर का चुनाव: मूंगफली के लिए बैटरी स्प्रेयर या हाथ वाला नैपसैक अच्छा रहता है। फसल नीची है, इसलिए पहुंच की दिक्कत नहीं, और एक जैसी चाल से कवरेज भी एक जैसा रहता है।
  • समय: बुवाई के लगभग एक महीने बाद से फसल पर ध्यान से नज़र रखिए, जब पत्ती धब्बा शुरू हो सकता है।

कौन सी स्प्रेयर मशीन किस काम के लिए

स्प्रेयर का प्रकारमुख्य स्पेसिफिकेशनखरीफ में सबसे सही उपयोग
हाथ वाला नैपसैक16 से 20 लीटर टंकी, हाथ से पंप, न पेट्रोल न चार्जिंगछोटे खेत, धान, मूंगफली, जगह-जगह छिड़काव
बैटरी स्प्रेयर16 से 20 लीटर टंकी, 100 से 110 PSI, 12 V बैटरीधान, मूंगफली, छोटे और मध्यम खेत में कपास और सोयाबीन
पावर स्प्रेयरपेट्रोल इंजन, 30 से 35 kg/cm², 10.5 लीटर प्रति मिनट, ज़्यादातर मॉडल में 20 लीटर टंकीसोयाबीन और कपास का बड़ा रकबा, ऊंची फसल
HTP स्प्रेयर22 या 30 लीटर प्रति मिनट, 30 से 35 kg/cm², 100 मीटर तक पाइप, 2 या 3 लाइनबड़े रकबे में ऊंची कपास, बाग, साथ मिलकर छिड़काव करने वाली टीम
Hi-Jet स्प्रे गन और लांसपीतल की गन और टेलिस्कोपिक लांसपावर और HTP स्प्रेयर में ज़्यादा पहुंच

अगर आपका ज़्यादातर काम सब्ज़ी या कतार वाली फसलों पर अकेले छिड़काव का है, तो हमारी नैपसैक, फुट और रॉकर स्प्रेयर की तुलना और खेती के लिए सबसे अच्छे बैटरी स्प्रेयर की गाइड में और जानकारी है।

हर फसल के लिए नोजल और प्रेशर

नोजल तय करता है कि छिड़काव निशाने तक पहुंचेगा या नहीं। ICAR की सोयाबीन सलाह में कीटनाशक के लिए हॉलो कोन नोजल सबसे अच्छा बताया गया है क्योंकि यह घोल एक जैसा फैलाता है, और खरपतवारनाशक के लिए सिर्फ फ्लैट फैन या फ्लड जेट नोजल इस्तेमाल करने को कहा गया है।

  • कपास, धान, सोयाबीन और मूंगफली में कीट और बीमारी: हॉलो कोन, बारीक बूंदों के लिए जो पत्तियों के अंदर और निचली सतह तक पहुंचें।
  • खरपतवारनाशक: फ्लैट फैन या फ्लड जेट, ज़मीन पर एक जैसी पट्टी के लिए।
  • ऊंचे पौधे और पहुंच: पतली धार पर सेट किया एडजस्टेबल नोजल या स्प्रे गन ज़्यादा दूर तक जाता है।
  • प्रेशर: कम प्रेशर से बड़ी बूंदें बनती हैं और कवरेज कमज़ोर रहता है, ज़्यादा प्रेशर से बहुत बारीक धुंध बनती है जो उड़ जाती है। हाथ वाले स्प्रेयर में एक जैसी लय से पंप कीजिए, और बैटरी व पावर स्प्रेयर को उसी प्रेशर पर चलाइए जिसके लिए वे बने हैं।

हमारी स्प्रे पंप नोजल के प्रकार वाली गाइड में हर नोजल और उसकी सही जगह समझाई गई है।

ऊंची फसल: HTP पर कब जाएं

जब फसल नैपसैक लांस की पहुंच से ऊंची हो जाए, या रकबा इतना बड़ा हो कि 16 लीटर की टंकी लेकर चलना मुश्किल हो, तब ज़्यादा क्षमता वाला सेटअप फायदे का है। HTP स्प्रेयर ड्रम के पास ज़मीन पर रखा रहता है और 30 से 35 kg/cm² पर 100 मीटर तक लंबे पाइप से घोल भेजता है, जिससे दो या तीन लोग एक साथ छिड़काव कर सकते हैं। ज़्यादा पहुंच के लिए इसके साथ Hi-Jet स्प्रे गन और लांस रेंज से लंबी पीतल की गन या टेलिस्कोपिक लांस लगाइए। साइज़ और सेटअप के लिए हमारी HTP स्प्रेयर पंप गाइड देखिए।

मानसून छिड़काव में सुरक्षा और PPE

  • सुरक्षा पहनिए: दस्ताने, फेस मास्क, टोपी, एप्रन और पूरी लंबाई की पैंट, जैसा वनस्पति संरक्षण निदेशालय सलाह देता है।
  • पहले स्प्रेयर जांचिए: रिसने वाला या खराब स्प्रेयर, या गलत नोजल इस्तेमाल न करें।
  • नोजल मुंह से कभी साफ न करें: इसकी जगह स्प्रेयर से बंधे टूथब्रश का इस्तेमाल कीजिए।
  • हवा की दिशा में छिड़काव: अपने ही छिड़काव की उड़ती दवा में कभी न चलें।
  • खाने से पहले धोइए: खाने, पीने या बीड़ी-सिगरेट से पहले हाथ और चेहरा धोइए।
  • लेबल मानिए: अपनी फसल के लिए बताई गई दवा, मात्रा और घोल ही इस्तेमाल कीजिए।

छिड़काव के बाद स्प्रेयर की सफाई

मानसून की नमी और बचा हुआ घोल स्प्रेयर को जल्दी खराब करते हैं। हर बार उसी दिन सफाई कीजिए।

  • टंकी खाली कीजिए: स्प्रेयर में घोल कभी भरा न छोड़ें।
  • साबुन और पानी से धोइए: स्प्रेयर और बाल्टियों को साफ पानी और डिटर्जेंट या साबुन से धोइए।
  • लाइन साफ कीजिए: पाइप, लांस और नोजल में साफ पानी तब तक पंप कीजिए जब तक पानी साफ न निकलने लगे।
  • नोजल और जाली साफ कीजिए: नोजल की टिप और जाली निकालकर मुलायम ब्रश से साफ कीजिए।
  • घिसने वाले पुर्ज़े जांचिए: सील, वॉशर, जाली और नोजल टिप देखिए, और अगले छिड़काव से पहले घिसे पुर्ज़े बदल दीजिए।
  • सुखाकर रखिए: स्प्रेयर को सूखने दीजिए, फिर खाने-पीने की चीज़ों और पशु आहार से दूर सूखी, ढकी जगह रखिए।
  • स्प्रेयर अलग रखिए: खरपतवारनाशक और कीटनाशक के लिए अलग-अलग स्प्रेयर रखिए, ताकि एक का बचा अंश दूसरे से छिड़की फसल को नुकसान न पहुंचाए।

घिसे वॉशर, नोजल और सील हमारी स्पेयर पार्ट्स रेंज में मिलते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

खरीफ के मौसम में खेती के लिए कौन सी स्प्रेयर मशीन सबसे अच्छी है?

यह फसल पर निर्भर है। बैटरी या हाथ वाला नैपसैक स्प्रेयर धान, मूंगफली और छोटे खेतों के लिए ठीक है। पावर स्प्रेयर सोयाबीन और कपास के बड़े रकबे के लिए ठीक है क्योंकि इसमें प्रति हेक्टेयर बहुत कम पानी लगता है। बड़े रकबे में ऊंची कपास के लिए लंबे पाइप वाला HTP स्प्रेयर दो या तीन लोगों से एक साथ छिड़काव करवाता है।

क्या मानसून में बारिश से पहले छिड़काव कर सकते हैं?

नहीं। वनस्पति संरक्षण, संगरोध एवं संग्रह निदेशालय की सलाह है कि बारिश से ठीक पहले या बारिश के तुरंत बाद छिड़काव न करें। ठंडे, शांत दिन में छिड़काव कीजिए और दवा बारिश में कितनी टिकती है यह लेबल पर देखिए। FAO की सलाह के अनुसार ज़्यादातर दवाओं में छिड़काव के दो घंटे बाद की बौछार से दोबारा छिड़काव की ज़रूरत नहीं पड़ती।

सोयाबीन में प्रति एकड़ कितना घोल चाहिए?

ICAR की सलाह के अनुसार सोयाबीन में नैपसैक स्प्रेयर से लगभग 500 लीटर प्रति हेक्टेयर, यानी लगभग 200 लीटर प्रति एकड़, या पावर स्प्रेयर से लगभग 120 लीटर प्रति हेक्टेयर, यानी लगभग 50 लीटर प्रति एकड़ घोल चाहिए। इससे कम पानी से मनचाहा नतीजा नहीं मिलता।

धान में भूरे फुदके के लिए छिड़काव कैसे करें?

भूरा फुदका पानी के ठीक ऊपर पौधे के निचले हिस्से पर जमा रहता है। तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय की सलाह है कि छिड़काव से पहले पानी निकाल दें और छिड़काव फसल के ऊपर से नहीं, पौधों के निचले हिस्से की तरफ करें।

फसल पर छिड़काव का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

सुबह या शाम, जब ठंडक हो और हवा हल्की हो। तेज़ धूप, तेज़ हवा और बिल्कुल ठहरी हवा से बचिए। ऐसी हल्की हवा जो चेहरे पर महसूस हो और पत्तियां सरसराएं, सबसे सही है, और छिड़काव हमेशा हवा की दिशा में कीजिए, उसके खिलाफ नहीं।

खरीफ फसलों के लिए कौन सा नोजल इस्तेमाल करें?

कीटनाशक और फफूंदनाशक के लिए हॉलो कोन नोजल लगाइए, क्योंकि यह बारीक बूंदें पत्तियों में एक जैसी फैलाता है। खरपतवारनाशक के लिए फ्लैट फैन या फ्लड जेट नोजल लगाइए। ऊंची फसल के लिए पतली धार पर सेट एडजस्टेबल नोजल या स्प्रे गन ज़्यादा पहुंच देता है।

छिड़काव के बाद स्प्रेयर कैसे साफ करें?

उसी दिन टंकी खाली कीजिए, स्प्रेयर और बाल्टियों को साफ पानी और साबुन से धोइए, पाइप और नोजल में साफ पानी चलाइए, नोजल की टिप और जाली साफ कीजिए, घिसे सील और वॉशर बदलिए, फिर स्प्रेयर को सुखाकर ढकी जगह रखिए।

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